गोरखपुर की मशहूर चीज क्या है
गीता प्रेस गोरखपुर
साल 1923 से सत्य एंड शान्ति _हेतु मानवमात्र की सेवा में सम्परित संस्थान
गोरखपुर -273005 ,उत्तर प्रदेश ,फोन ; 0551-2334721,2331250,2331251
100 साल | 15 भाषा | 72 करोड़ पुस्तकों
गीताप्रेस के संस्थापक श्रध्देय श्रीजयदयालजी गोयन्दका अकाल आदि के समय सुदूर गावों में
खुदवाने का कार्य करवाते थे | दैवी आपदा के समय सेवा करने के लिये उन्हेंने गीताप्रेस सेवादल
की स्थापना की थी |
गोरखनाथ मंदिर का इतिहास
गोरखनाथ को गोरखनाथ मठ के नाम से भी जाना जाता है |
यह मठ नाथ पंरपरा में नाथ मठ समूह का एक मंदिर है |
इसका नाम गोरखनाथ मध्ययुगीन संत गोरखनाथ (सी.11 वीं सदी )
से निकला है जो एक प्रसिद्ध योगी थे। नाथ पंरपरा गुरु मच्छेंद्र नाथ
द्धारा स्थापित की गई थी। गोरखनाथ मंदिर उसी स्थान पर स्थित है
जहाँ वह तपस्या करते थे और उनको श्रध्दाँजलि समप्रित करते हुए
यह मंदिर की स्थपना की गई।
मंदिर की मान्यता
उत्तर प्रदेश ,तराई क्षेत्र और नेपाल में यह मंदिर काफी लोकप्रिय है।
जो गुरु गोरखनाथ के साथ जुड़े कथा का एक यह चमत्कार है की जो
भी भक्त गोरखनाथ चालीसा 12 बार जप करता है वह दिब्य
ज्योति या चमत्कारी लौ के साथ ही धन्य हो जाता है।
गौरवशाली है मंदिर का इतिहास
इस मंदिर के प्रथम महंत श्री वरदरनाथ जी महाराज कहे जाते है ,
जो गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य थे। तपततरथ परमेश्वर नाथ
एवं गोरखनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार
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